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सरकारी अस्पताल में एक महिने से नहीं हो रहा बच्चों का टीकाकरण

परिजन लगा रहे है अस्पताल के चक्कर
रींगस। सरकार के द्वारा जहां शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मातृत्व का नारा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर कस्बे के सरकारी अस्पताल में पिछले एक महीने से बच्चों के लगने वाले टीकों का अभाव चल रहा है। टीकों के अभाव परिजन प्रत्येक गुरूवार को सीएचसी का चक्कर लगाते है, लेकिन टीके नहीं होने के कारण उनको निराश लोटना पड़ रहा है। कस्बे के श्याम सुन्दर अरोडा ने बताया कि वे अपने जुडवा दोहिते व दोहिती के डिपीटी बूस्टर टीका लगवाने के लिए पिछले एक माह से सीएचसी का चक्कर लगा रहे है लेकिन हर बार टीका नहीं आने की बात कहकर उन्हे लोटा दिया जाता है यही हाल अन्य बच्चों के परिजनों व ग्रामीण क्षैत्रों की एएनएम का है उन्हे भी बच्चो के टीके लगाने के लिए डिपीटी बूस्टर नहीं मिल रहे है।

सीएचसी प्रभारी डॉ. एसपी भुराडिया ने बताया कि टीकों की कमी के लिए विभाग को अवगत करवाया गया है लेकिन पिछले एक महिने से टीकों की सप्लाई नहीं आ रही है जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सीएचसी में इन टीकों की चल रही है कमी
सीएचसी में पिछले एक महीने से बच्चों के लगने वाले डीपीटी बूस्टर की सप्लाई नहीं आयी है, वहीं गुरूवार से पोलियो व आईपीवी टीके भी खत्म हो गये है, अन्य टीके भी खत्म होने के कारण बच्चों के परिजनों की समस्या घटने के बजाय और अधिक बढ गई है।

कब और क्यू लगते है टीके
छोटे बच्चों में डीपीटी बूस्टर टिटनेस, डिप्थीरिया व काली खासी से बचाव के लिए अठारह माह की उम्र में लगाया जाता है। आईपीवी टीका पोलियो से बचाव के लिए डेढ माह व तीन माह की उम्र में लगाया जता है। लेकिन इन जरूरी टीकों की कमी से शिशुओं की स्वस्थ्य पर खतरा नजर आ रहा है।
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